प्रखंड की कुअमा पंचायत में वर्षों से चली आ रही धार्मिक यात्रा की परंपरा इस साल भी जारी रही। मंगलवार को कुअमा पंचायत से करीब 78 श्रद्धालुओं की कीर्तन मंडली सीताराम धुन और भजन-कीर्तन करते हुए ट्रैक्टर से वृंदावन एवं मथुरापुर के लिए रवाना हुई।यात्रा शुरू होते ही श्रद्धालुओं के जयकारे और सीताराम धुन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंडली के सदस्यों में यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। श्रद्धालु रास्ते-भर भजन-कीर्तन करते हुए निर्धारित धार्मिक स्थलों तक पहुंचेंगे और वहां पूजा-अर्चना एवं दर्शन करेंगे। इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व कुअमा पंचायत के पूर्व मुखिया संजय कुमार वर्मा उर्फ डब्बू कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में पंचायत के श्रद्धालुओं की मंडली प्रत्येक वर्ष अलग-अलग धार्मिक एवं ऐतिहासिक तीर्थस्थलों का भ्रमण करती रही है। वर्षों से जारी इस यात्रा ने अब ग्रामीणों के बीच धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता की एक परंपरा का रूप ले लिया है। गांव के लोग आपसी सहयोग से यात्रा की तैयारियां करते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। कीर्तन मंडली के सदस्यों के अनुसार, इससे पहले भी मंडली के श्रद्धालु देश के कई प्रसिद्ध तीर्थस्थलों का भ्रमण कर चुके हैं। मंडली द्वारा जगन्नाथ मंदिर, प्रयागराज, विंध्याचल मंदिर, अयोध्या, जनकपुर, बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ, रजरप्पा स्थान और काशी विश्वनाथ सहित कई धार्मिक स्थलों पर जाकर दर्शन और पूजा-अर्चना की जा चुकी है। प्रत्येक वर्ष यात्रा के लिए नए धार्मिक स्थलों का चयन किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को देश के अलग-अलग प्रसिद्ध तीर्थों के दर्शन का अवसर मिल सके। इसी क्रम में इस वर्ष वृंदावन और मथुरापुर की धार्मिक यात्रा निर्धारित की गई है। मंगलवार को यात्रा के लिए श्रद्धालु ट्रैक्टरों पर सवार होकर रवाना हुए।सामूहिक यात्रा से मजबूत हो रहा आपसी जुड़ाव ग्रामीणों का कहना है कि इससे पंचायत के लोगों के बीच आपसी मेल-जोल और भाईचारा बढ़ता है। अलग-अलग परिवारों के लोग एक साथ यात्रा में शामिल होते हैं। कई दिनों तक साथ रहने और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने से आपसी संबंध और मजबूत होते हैं। बुजुर्ग श्रद्धालु भी इस यात्रा में उत्साह के साथ शामिल होते हैं और युवा पीढ़ी को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। उनका कहना है कि हर वर्ष धार्मिक यात्रा आयोजित करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन कराने के साथ सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का अवसर देना है। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु अनुशासन के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।