वृंदावन: वृंदावन की गलियों में भक्ति का अंदाज बदल रहा है। कथा सुनाने का तरीका बदल गया है। कथा के पंडाल में कभी बुजुर्ग अधिक दिखते थे। आज युवाओं की भीड़ है। यह भीड़ उन कथावाचकों के पास ही अधिक आ रही है जो इंटरनेट मीडिया में अधिक सक्रिय हैं। इनकी सहज शैली, प्रसंग कहने का ढंग और प्रभावी उदाहरण आकर्षित कर रहे हैं। अनिरुद्धाचार्य, इंद्रेश उपाध्याय, पुंडरीक महाराज, जया किशोरी, गौरव कृष्ण गोस्वामी और देवी चित्रलेखा जैसे युवा कथावाचक ने प्रभावी शैली और आकर्षक मंच से नई पीढ़ी से संवाद का रास्ता बनाया है।अनिरुद्धाचार्य : सहजता और हास्य से संवादअनिरुद्धाचार्य की कथा शैली, बोलचाल की भाषा और रोजमर्रा के उदाहरणों पर टिकी है। परिवार, रिश्ते, विवाह, माता-पिता और जीवन की उलझनों को वह धार्मिक प्रसंगों से जोड़ते हैं। चुटीले अंदाज से भरी उनकी इस सहज शैली को इंटरनेट मीडिया ने व्यापक दर्शक तक पहुंचाया है।