वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर साल में एक बार होने वाले चरण-सर्वांग दर्शन होंगे, जिसमें ठाकुरजी का चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और मनोकामनाएं लेकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

Banke Bihari adorned with sandalwood Mysore Bengaluru

अक्षय तृतीया पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में अद्भुत चरण-सर्वांग दर्शन होंगे। वर्ष में एक बार होने वाले इन दर्शन के लिए दूरदराज से श्रद्धालुओं को सैलाब उमड़ता है। मैसूर और बेंगलुरु से ठाकुरजी शृंगार के लिए चंदन मंगाया गया है। ठाकुरजी को चंदन का विशेष शृंगार कर चांदनी रंग के आकर्षक वस्त्र धारण कराए जाएंगे। उन्हें सतुआ के लड्डू, मेवा, फल, मिष्ठान्न, ठंडाई और शर्बत जैसे शीतल पदार्थ अर्पित किए जाएंगे। प्रभु के चरणों में चंदन के बड़े-बड़े गोले (लड्डू) अर्पित किए जाएंगे।

आयोजन को लेकर मंदिर प्रशासन और सेवायतों द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिर के सेवायत एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वर्षभर में केवल इसी दिन ठाकुरजी के श्रीचरणों सहित चंदन लेपित संपूर्ण स्वरुप के दर्शन होते हैं। यही कारण है कि इस दिन को देव दुर्लभ योग माना जाता है। उन्होंने बताया कि भक्तों को मिलने वाला प्रसादी चंदन औषधीय गुणों से युक्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस चंदन को सुखाकर गोलियों के रूप में तैयार कर सेवन करने से असाध्य रोगों में लाभ मिलता है । यह प्रसाद देश-विदेश में रहने वाले भक्तों को भेजा जाता है।

अक्षय तृतीय पर बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवतियां विवाह की मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं। वह सोने-चांदी की पायल, चरण चौकी आदि ठाकुरजी को अर्पित कर अपने विवाह की कामना करते हैं। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रहलाद बल्लभ के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया रविवार सुबह 10:49 बजे से प्रारंभ होकर सोमवार सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। श्रीबांकेबिहारी सहित अधिकांश मंदिरों में सोमवार को मुख्य उत्सव मनाया जाएगा जबकि कुछ स्थानों पर रविवार को भी आयोजन होंगे।

महोत्सव के लिए बेंगलुरु और मैसूर से मंगाए गए उत्तम गुणवत्ता के चंदन को गुलाबजल में भिगोकर घिसा जा रहा है। इसमें कश्मीरी केसर, कन्नौज का इत्र और कपूर मिलाकर बड़े-बड़े चंदन के गोले तैयार किए जा रहे हैं। इस वर्ष सुबह और शाम करीब 100 से 150 किलोग्राम चंदन ठाकुरजी को अर्पित किया जाएगा। आराध्य के श्रीविग्रह पर लेपन के लिए ताजा चंदन उसी दिन तैयार किया जाएगा।

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