पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है।तर्पण में जल के साथ काले तिल का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।धार्मिक परंपराओं में तिल को पवित्र और पितृ कर्म से जुड़ा पदार्थ माना गया है।कई परंपराओं में देवताओं के लिए सफेद तिल और पितरों के लिए काले तिल का उल्लेख मिलता है।तिल मिले जल से किया गया तर्पण कई हिंदू पद्धतियों में पारंपरिक विधि का हिस्सा है।क्या बिना तिल के श्राद्ध हो सकता है?इसका उत्तर पूरी तरह आपकी परंपरा और श्राद्ध की विधि पर निर्भर करता है।कुछ पद्धतियों में तिल तर्पण का आवश्यक हिस्सा माना जाता है, जबकि अलग परिस्थितियों में पुरोहित द्वारा वैकल्पिक विधि बताई जा सकती है।इसलिए यदि घर में काले तिल उपलब्ध न हों, तो अपनी कुल-परंपरा के अनुसार किसी योग्य पुरोहित से विधि पूछना उचित रहेगा।श्राद्ध का मुख्य भाव अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण, तर्पण, दान और सेवा माना जाता है।अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में श्राद्ध की विधि में अंतर भी पाया जाता है।