त्रिवेणी घाट पर गंगा स्नान के पहुंची 1221वीं पवित्र छड़ी यात्रा। इस दौरान संत-महात्माओं के साथ छड़ी का पूजन और गंगा स्नान कर गौरी शंकर मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया। छड़ी यात्रा का संचालन षड्दर्शन साधु समाज और अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिति कि ओर से किया जा रहा है। महंत भूपेंद्र गिरी और गोपाल गिरी ने बताया कि आदिगुरू शंकराचार्य ने भारतवर्ष के प्राचीन देवस्थानों का संरक्षण और अखाड़ा व्यवस्था के संगठन को लेकर अनेक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि उनके समय में साधु-संतों ने विभिन्न तीर्थों, मठों और मंदिरों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया और धर्मरक्षा के लिए संगठित परंपराओं को मजबूत किया। ऋषिकेश से निकलने वाली छड़ी यात्रा यात्रा जानकी चट्टी के रास्ते यमुनोत्री धाम पहुंचेगी, जहां पूजा-अर्चना के बाद वापसी होगी। इसके बाद उत्तरकाशी, विश्वनाथ मंदिर और शिवानंद आश्रम में दर्शन करते हुए गंगोत्री धाम में पूजन किया जाएगा। गोमुख में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा सोनप्रयाग, त्रियुगीनारायण और गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां बाबा केदारनाथ के दर्शन, आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि पूजन और भैरवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना होगी। अंतिम चरण में यात्रा जोशीमठ, नृसिंह मंदिर और टोटकाचार्य गुफा होते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी, जहां भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के साथ व्यास गुफा और सरस्वती धारा के दर्शन किए जाएंगे।

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