पितृ पक्ष में नए कपड़े खरीदने को लेकर एक ही सार्वभौमिक शास्त्रीय नियम नहीं मिलता। अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएँ अलग हैं।पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य पितरों का श्राद्ध, तर्पण और स्मरण माना जाता है।कई परिवार इस अवधि में नए कपड़े, आभूषण या बड़े शुभ कार्यों की खरीदारी से बचते हैं।लेकिन सामान्य जरूरत के लिए कपड़े खरीदना अपने-आप में सभी परंपराओं में निषिद्ध नहीं माना जाता।श्राद्ध के दिन साफ-सुथरे वस्त्र पहनना और सात्त्विक आचरण रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।यदि आपके परिवार या गुरु-परंपरा में पितृ पक्ष में नई वस्तुएँ खरीदने से मना किया जाता है, तो उसी परंपरा का पालन करना उचित है।सीधी बात: “पितृ पक्ष में नए कपड़े खरीदना महापाप है” कहना सही नहीं होगा। यह मुख्यतः परंपरा और धार्मिक आचार का विषय है।

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