दुनिया का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग हरिद्वार में स्थापित किया जा रहा है, जिसका वजन लगभग 5200 किलो है और इसमें 3333 किलो शुद्ध पारे का उपयोग किया गया है। यह शिवलिंग 4.5 फिट ऊंचाई और 1.5 फिट की गोलाई के साथ बनाया गया है। 

दुनिया के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा 17 जून को हरिद्वार में की जाएगी। शिवलिंग 5210 किलोग्राम वजनी है पारद ध्यान लिंगम का निर्माण गिरनार के ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी ने वर्षों की साधना, अनुसंधान और अथक परिश्रम के बाद किया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अनेक राजनीतिक और कॉर्पोरेट जगत की हस्तियां शामिल होंगी।

लगातार रिसर्च के बाद तैयार किए गए 5210 किलोग्राम वजन और अद्वितीय आकार के कारण इस पारद ध्यान लिंगम को इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी है। इसे विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग माना गया है।

ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान और हीलिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं। गिरनार में लगातार 12 वर्षों की कठोर साधना के पश्चात उन्होंने योग, ध्यान, हीलिंग और हस्तरेखा अध्ययन में कार्य प्रारंभ किया। अध्यात्म में विज्ञान की खोज के अपने संकल्प के तहत नाथ योगी परंपरा और प्राचीन रसायन शास्त्र के सिद्धांतों पर आधारित इस पारद ध्यान लिंगम के निर्माण का नेतृत्व उन्होंने किया।

दुनिया का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग हरिद्वार में स्थापित किया जा रहा है, जिसका वजन लगभग 5200 किलो है और इसमें 3333 किलो शुद्ध पारे का उपयोग किया गया है। यह शिवलिंग 4.5 फिट ऊंचाई और 1.5 फिट की गोलाई के साथ बनाया गया है। इसकी स्थापना श्री साई शिवगंगा धाम में की गई है, जो हरिद्वार से दिल्ली रोड पर टोल प्लाजा के निकट स्थित है।

यह शिवलिंग न केवल अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके पीछे की कहानी और धार्मिक महत्व भी बहुत है। इसे विश्व शांति की भावना से स्थापित किया गया है और इसके निर्माण में 10 साल का समय लगा है।

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