अखाड़ा परिषद का पूरा जोर है कि माईवाड़ा का निर्माण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए। उज्जैन में अगला सिंहस्थ अप्रैल-मई 2028 में होगा। उससे पहले लाखों श्रद्धालुओं और संतों का आना शुरू हो जाता है।

Simhastha 2028 Gift: Maiwada to Be Built on Shipra Banks, Ensuring Respect, Food, Shelter and Devotional Spac

धर्म और साधना की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने यहां संन्यास ले चुकी वृद्ध साध्वी माताओं और सन्यासिनी महिलाओं के लिए ‘माईवाड़ा’ बनाने का निर्णय लिया है। परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रविंद्र पुरी ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस विशेष परिसर में साध्वी माताओं के लिए आवास, अन्नक्षेत्र, स्नान और भजन-पूजन की संपूर्ण व्यवस्था रहेगी।

महंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि हर सिंहस्थ में देशभर से लाखों साधु-संत और साध्वी माताएं उज्जैन पहुंचती हैं। पुरुष संतों के लिए अखाड़ों और आश्रमों में पर्याप्त व्यवस्था रहती है, लेकिन वृद्ध और एकाकी जीवन जी रही सन्यासिनी माताओं के लिए कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है। कई बार उन्हें खुले या असुरक्षित स्थानों पर ठहरना पड़ता है। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में भीड़ और अव्यवस्था के बीच सबसे अधिक परेशानी इन्हीं माताओं को होती है।

इसी जरूरत को देखते हुए अखाड़ा परिषद ने माईवाड़ा की परिकल्पना की है। इसे शिप्रा नदी के तट के समीप विकसित करने का प्रस्ताव है। यह केवल आवासीय परिसर नहीं होगा, बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य
अखाड़ा परिषद का लक्ष्य माईवाड़ा का निर्माण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करना है। उज्जैन में अगला सिंहस्थ अप्रैल-मई 2028 में प्रस्तावित है। उससे पहले बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है। ऐसे में समय पर निर्माण पूरा होने पर देशभर से आने वाली सैकड़ों वृद्ध साध्वी माताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

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