ओडिशा की संस्कृति को समझना है, तो वहां के लोकगीतों को समझिए। यहां की लोक संस्कृति में दालखाई लोकगीत की खास जगह है। ये एक लोकगीत होने के साथ-साख लोक नृत्य भी है और पश्चिमी ओडिशा में मुख्य रूप से मशहूर है। ओडिशा के संबलपुर, बलांगीर जैसे क्षेत्रों में त्योहार के दौरान दालखाई जरूर गाया जाता है, जिस पर महिलाएं साथ मिलकर नृत्य भी करती हैं। आइए जानें दालखाई लोकगीत कैसे गाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई। दालखाई का इतिहास दालखाई संगीत और नृत्य का इतिहास पश्चिमी ओडिशा की आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा है। इसे प्रकृति की पूजा से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत संबलपुर के जनजातीय समुदायों, जैसे- गोंड, मिर्धा आदि ने की थी। समय के साथ ये सिर्फ जनजातीय समुदाय तक सीमित नहीं रहकर पूरे ओडिशा की संस्कृति का प्रतीक बन गया।