हिंदू धर्म में मंदिर को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का पवित्र स्थान माना जाता है।मंदिर निर्माण में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान करते हैं।कई जगहों पर दानदाताओं या अन्य लोगों के नाम पत्थरों और दीवारों पर लिखे दिखाई देते हैं।लेकिन मंदिर में नाम लिखवाने को लेकर धार्मिक दृष्टि से सवाल भी उठते हैं।संत प्रेमानंद जी महाराज से भी एक भक्त ने इसी विषय पर सवाल किया था।उन्होंने मंदिर में ऐसी जगह नाम लिखवाने से बचने की बात कही, जहां लोगों के पैर पड़ सकते हैं।मंदिरों में कई बार भगवान के नाम जैसे राम और श्याम भी पत्थरों पर अंकित होते हैं।ऐसे नामों पर अनजाने में पैर पड़ने से श्रद्धालुओं के मन में अपराधबोध पैदा हो सकता है।महाराज के अनुसार भगवान के पवित्र नाम का अनादर नहीं होना चाहिए।इसी कारण मंदिर की सीढ़ियों, फर्श या आने-जाने वाली जगहों पर नाम लिखवाना उचित नहीं माना गया।उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसा अज्ञानता के कारण कर देते हैं।यदि किसी पत्थर पर भगवान का नाम लिखा हो तो श्रद्धालुओं को उस पर पैर रखने से बचना चाहिए।ऐसे स्थान से थोड़ा हटकर निकलना बेहतर माना गया है।संदेश यह है कि मंदिर में योगदान करते समय भी भगवान के नाम और पवित्र स्थान की मर्यादा का ध्यान रखा जाए।श्रद्धा का उद्देश्य अपना नाम अमर करना नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति और सेवा करना होना चाहिए।