संस्कृति संसद में संतों ने कहा कि जो राम और कृष्ण पर अपमान कर रहे वे
सड़कछाप हैं। हम राम और कृष्ण के नाम पर दुनिया में घुमते हैं। इसलिए तुलसीदास को प्रमाण मानते हैं।

संस्कृति संसद में संतों ने सनातन के ग्रंथों, धर्म के संरक्षण और दुनिया में इसके विस्तार विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में सनातन के बढ़ते प्रभाव से अन्य धर्मों को दिक्कत हो रही है। इसलिए वह इसके खिलाफ तरह-तरह के षड़यंत्र कर रहे हैं। ऐसे में संत समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
कैवल्य अध्यक्ष एवं अनंत श्रीविभूषित निर्वाण पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने कहा कि भारत विश्व गुरु के साथ इंद्र गुरु भी था। जो राम, कृष्ण का अपमान करते हैं वह सड़क छाप होंगे। हम राम और कृष्ण के नाम पर दुनिया में घुमते हैं। इसलिए तुलसीदास को प्रमाण मानते हैं।
धर्मग्रंथों के मूल स्वरूप को समझने की जरूरत है और बिना प्रमाण के मनगढ़ंत बातें प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए शास्त्रों के आधार पर संवाद जरूरी है। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष कैवल्य अवचिल देवाचार्य ने कहा कि दुनिया में सनातनी बढ़ रहे हैं। उनको सनातन अच्छा लग रहा है। मगर, अन्य धर्मों को इससे दिक्कत हो रही है। इसलिए इसको तोड़ने के लिए युवाओं के विचारों पर प्रहार कर रहे हैं। उनको वैचारिक रूप से गुलाम बना रहे हैं। कहा कि युवा पीढ़ी को कैसे अपनी परंपरा से जोड़ें ये सोचना होगा। उनसे संवाद बढ़ाएं। क्योंकि बिना परंपरा और संस्कृति के जीवन अनियंत्रित हो जाता है।
प्रो. नागेंद्र पांडेय, जगद्गुरु मौली सरकार, जनार्दन हरी, महामंडलेश्वर मनमोहन दास राधे-रोध बाबा, जगद्गुरु अविचलदेवाचार्य, सुनील देवधर,गोविंद शर्मा, अशोक तिवारी, प्रो. ओमप्रकाश सिंह, राज्यसभा सांसद विद्यासागर सोनकर, श्रीमहंत राजेंद्र दास, लेखक और वैज्ञानिक डॉ. मधुसूदन उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र राय, साहित्यकार सर्वेश तिवारी, श्रीकाशी विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष नागेंद्र पांडेय, विधायक और आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकैलाशाचार्य, तिर्मठ के प्रधान पुरोहित पं. ऋषि प्रसाद सत्ती, डॉ. हरिशंकर कंसाना आदि ने विचार व्यक्त किए।