ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली और उत्तराखंड सरकार के संस्कृति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव कला प्रवाह का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संस्कृति और नृत्य और आध्यात्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। बृहस्पतिवार को महोत्सव का उद्घाटन परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने किया। शुभारंभ ऋषिकुमारों के वैदिक मंत्रोच्चार और हनुमान चालीसा पाठ से हुआ। इसके बाद लोक गायिका हेमा नेगी करासी ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय कला और संगीत देश की आत्मा की अभिव्यक्ति हैं। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ते हैं। महाराष्ट्र के रतन मोहन शर्मा ने हवेली संगीत और दिल्ली के कथक केंद्र ने नमामि गंगे विषय पर कथक नृत्य प्रस्तुत किया। महोत्सव में हरिकथा, भरतनाट्यम, कथक और पश्चिम बंगाल के बाउल संगीत की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, पद्मश्री लोक गायिका डॉ. बसंती बिष्ट और हिमांशु डामोरा सहित लोग मौजूद रहे।