
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक अस्मिता और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संतों के मार्गदर्शन को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके आशीर्वाद से उत्तराखंड विकास, धर्म और संस्कृति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक स्थित वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कहीं। इस कथा का आयोजन श्री राधागोविंद सेवा समिति द्वारा किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने ऋषिकेश, हरिद्वार, केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत पूरे उत्तराखंड को भारत की सनातन आत्मा का जीवंत स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि तीर्थ स्थलों का समुचित विकास हो। श्रद्धालुओं को सभी आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों।
साथ ही, आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से मजबूती से जुड़ी रहें। कथा में प्रसिद्ध कथावाचक गोविंददेव गिरी महाराज भक्तों को कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा के पहले दिन मुख्यमंत्री धामी के साथ परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी प्रतिभाग किया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में उत्तराखंड को नकारात्मक धारणा की नहीं, बल्कि नटराज की धरती बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं है। यह देवताओं, ऋषियों, तपस्वियों और दिव्य चेतना की पावन भूमि है। यह वह धरा है जहां हिमालय की गोद में ऋषियों ने तपस्या की और मां गंगा का अवतरण हुआ। यहां के प्रत्येक कण में आध्यात्मिकता, संस्कृति और सनातन जीवन मूल्यों की सुगंध विद्यमान है।
कथावाचक गोविंददेव गिरी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के अंतर्मन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार कर रही है। वे अपनी कथाओं के माध्यम से धर्म, नीति, करुणा, सेवा, प्रेम और समर्पण का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।