काशी विश्वनाथ मंदिर में अक्षय तृतीया से बाबा को शीतलता हेतु फव्वारा (जलधरी) सेवा शुरू होगी, जो रक्षाबंधन तक चलेगी। शहर के प्रमुख मंदिरों में चंदन लेपन, शीतल भोग, कूलर-पंखे और फलाहार की व्यवस्था की गई है, ताकि गर्मी में देव विग्रहों को शीतलता प्रदान की जा सके।

वसंत ऋतु खत्म होते ही ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) के आगमन होते ही सूर्यदेव की तल्खी से आमजन बेहाल होने लगे हैं। अक्षय तृतीया पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा को शीतलता के लिए जलधरी यानी फव्वारा लगेगा। वहीं, अन्य शिवलयों में जलधरी और बाकी मंदिरों में देव विग्रहों को शीतल भोग-राग और चंदन शृंगार और लेपन शुरू हो गया। कूलर और पंखे भी लग हैं।
अक्षय तृतीया पर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में परंपरानुसार श्री विश्वेश्वर के लिए शीतलता के लिए फव्वारा लगाया जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि फौव्वारा सेवा का शुभारंभ सप्तऋषि आरती के साथ होगा। यह व्यवस्था रक्षाबंधन तक प्रतिदिन निरंतर रूप से बाबा की सेवा में समर्पित रहेगी। शीतलता युक्त भोग भी बाबा को लगाया जाएगा। महामृत्युजय महादेव, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, जागेश्वर महादेव, शूलटंकेश्वर, मार्कंडेय महादेव रामेश्वर आदि शिवालयों में जलधरी और भोग में बदलाव हुआ है।
माता विशालाक्षी मीरघाट, बड़ी शीतला माता मंदिर दशाश्वमेध, मां दुर्गा मंदिर दुर्गाकुंड, संकटमोचन मंदिर, मानस मंदिर आदि मंदिरों में गर्मी को देखते हुए व्यवस्थाएं बदली हैं। शीतला माता मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि मंदिरों में कूलर, पंखा लगाए गए हैं। चंदन लेपन, भोग में खीरा, ककड़ी, सत्तू, फालसा, तरबूज सहित अन्य ऋतु फल भोग में लगाए जा रहे हैं। ग्रीष्म ऋतुभर राधा-कृष्ण मंदिरों में चंदन से विशेष शृंगार हो रहे है।
गुलाब और केवड़ा जल का करा रहे पान
पुष्टिमार्गीय पीठों में षष्ठपीठ गोपाल मंदिर, बेटी जी मंदिर में ग्रीष्म ऋतु में विशेष शृंगार व भोग की व्यवस्था की गई है। वैष्णव अनुयायी अशोक वल्लभदास ने बताया कि ठाकुर जी को भोग, राग और चंदन शृंगार शुरू हो गया है। सत्तू, फलों में लीची, फालसा, पपीता आदि का भोग लग रहा है। गुलाबजल और केवड़ा युक्त जल ठाकुर जी को पान कराया जाता है। नौ तरह के सुगंधित फूलों में चंपा, चमेली, कमल, गुलाब, बेला से शृंगार होता है।