ब्रज के धर्माचार्यों ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से माफी मांगने की मांग की है। अन्यथा वृंदावन में प्रवेश नहीं करने देने की चेतावनी दी है।

Outrage among Vrindavan sants over Dhirendra Krishna Shastri referring to Shri Krishna as tedha

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम को सीधा और भगवान कृष्ण को टेढ़ा कहे जाने पर ब्रज के धर्माचार्यों में हलचल मच गई है। महंत एवं धर्माचार्यों ने उनसे अपने कथन पर माफी मांगने को कहा है। महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि यदि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने व्यंग्य में ऐसा कहा है तो उन्हें वृंदावन में नहीं घुसने दिया जाएगा। हालांकि उनके कथन पर बखेड़ा खड़ा होने पर उन्होंने माफी मांग ली है। इसका वीडियो जारी किया है।

महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के बारे में हंसी-मजाक में कहा तो ठीक है, यदि व्यंग्य में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण के लिए टेढ़े होने की बात कही है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए। अन्यथा उन्हें वृंदावन में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। जैसे गुरु शरणानंद ने भगवान श्रीकृष्ण को गाली दी थी तो दो साल वृंदावन में घुसने नहीं दिया। संत मोरारी बापू ने भी भगवान श्रीकृष्ण के बारे में गलत बोला उनको भी घुसने नहीं दिया। स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने कहा कि जब करोड़ों भक्तों की आस्था का विषय होता है तो बोलने से पहले चिंतन-मनन कर लेना चाहिए। कार्ष्णि नागेंद्र महाराज ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का ऐसा मंतव्य नहीं है कि ठाकुरजी का मजाक उड़ाया जाए। भाव में आकर ऐसी बात बोली है।

इधर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर अपने कहे पर क्षमा मांगी है। इस संबंध में उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि एक वीडियो में भाव विह्वल होकर ठाकुरजी को भावपूर्ण उलाहना ठाकुरजी को दिया था कि हमारे प्रभु राम सीधे हैं और भगवान श्रीकृष्ण टेढ़े हैं। उन्होंने कहा कि इस वीडियो पर बहुत लोगों ने अर्थ का अनर्थ निकालकर अनर्गल विलाप किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण एवं ब्रज के भक्त हैं। ब्रजवास की चाहना रखते हैं और ठाकुरजी से प्रार्थना करते हैं, उन्हें ब्रजवास मिले। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वह भगवान राम और कृष्ण में भेद उत्पन्न करना नहीं चाह रहे थे। जैसे सखियां प्रभु राम को गाली देकर उलाहना देती, जैसे गोपियां ठाकुर श्रीकृष्ण का उलाहना देती, वैसे ही भाव में एक संत का बहुप्रचलित पद वंशी बजाना खेल ही है पर धनुष उठाना खेल नहीं की व्याख्या कर रहे थे। इस पर लोगों ने उन्हें कृष्ण विरोधी घोषित कर दिया, जबकि वह कृष्ण विरोधी नहीं हैं।

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