लखनऊ। भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति उसके संस्कारों और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। देश में गुरुकुल व्यवस्था की आवश्यकता है। ये बातें पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने बृहस्पतिवार को ऐशबाग स्थित डीएवी कॉलेज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं। उन्होंने कहा कि गुरुकुलों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जोड़ा जा सकता है।उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्तों के प्रति उनकी करूणा का वर्णन किया। अयोध्याधाम के प्रमुख संत महंत डॉ. स्वामी भरत दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को तीन से चार बजे तक युवाओं के लिए विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। बृहस्पतिवार को कथा में विधायक नीरज बोरा भी उपस्थित रहे।