बांकेबिहारी मंदिर में परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को चांदी के रथ और शेषनाग पर विराजमान न कराए जाने के मामले में हाईपावर्ड कमेटी ने जांच के आदेश दिए हैं। एसएसपी, एमवीडीए उपाध्यक्ष और नगरायुक्त की तीन सदस्यीय कमेटी पूरे मामले की पड़ताल करेगी, वहीं मंदिर के 98 लाख रुपये के भुगतान समेत कई मुद्दों पर भी सवाल उठे।
वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर हाईपावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की 19वीं बैठक में महत्तवपूर्ण निर्णय लिए गए। ठाकुर जी को भेंट किए स्वर्ण रजत हिंडोला (झूला), रथ, रजत शेष सिंहासन, स्वर्ण व रजत चांदी नौका, हाथी सूंढ़ सिंहासन, सूर्यप्रभा सिंहासन, चंद्रप्रभा सिंहासन मंदिर में परंपरा के अनुसार न लग पाने के मामले में जांच के लिए एक कमेटी गठित की है।सर्वसम्मति से कमेटी में एसएसपी, एमवीडीए की अध्यक्ष और नगरायुक्त को रखा गया है। जांच कमेटी कई बिंदुओं पर पड़ताल करेगी। बताया गया कि जग्गनाथ रथयात्रा में चांदी के रथ पर और सावन में महाशिवरात्रि पर चांदी के शेषनाग पर ठाकुरजी विराजते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ था। इसके अलावा मंदिर में व्यवस्थाओं से जुड़े कई मामलों में मंथन हुआ।
लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एवं समिति अध्यक्ष अशोक कुमार ने की। बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर चर्चा हुई। चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि कुछ भंडारी एवं अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे।इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भंडारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। श्रद्धालुओं को चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुरूप भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई।