
परमार्थ निकेतन आध्यात्मिक संगम का केंद्र बना। स्वामी सुधांशु महाराज ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने ऋषिकेश पहुंचे। साध्वी भगवती सरस्वती भी इस वार्ता में शामिल रहीं। वेद मंत्र, पुष्प वर्षा और शंख ध्वनि से स्वागत के बाद संतों ने संवाद किया। संतों ने संदेश दिया कि तकनीक ने दुनिया जोड़ी है, हृदय जोड़ने का काम अध्यात्म करेगा। भारत की शक्ति आध्यात्मिक विरासत है और आने वाला भारत नैतिक व आध्यात्मिक चेतना से विश्व का नेतृत्व करेगा। इस दौरान संतों ने पर्यावरण, जल संरक्षण और यमुना स्वच्छता पर चर्चा की। स्वामी चिदानंद ने सुधांशु महाराज को हिमालय का रुद्राक्ष पौधा भेंट किया।