अविमुक्तेश्वरानंद

उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने 81 दिवसीय गविष्ठी यात्रा के 23वें दिन प्रयागराज के यमुनापार क्षेत्र में पहुंचे। यहां पर उन्होंने सभी पांच विधानसभाओं में गौरक्षा का संकल्प लिया।

Shankaracharya said: The foundation of Sanatan Dharma is being attacked through the cow, cow slaughter

उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने 81 दिवसीय गविष्ठी यात्रा के 23वें दिन प्रयागराज के यमुनापार क्षेत्र में पहुंचे। यहां पर उन्होंने सभी पांच विधानसभाओं में गौरक्षा का संकल्प लिया। जगह-जगह उनका जोरदार स्वागत किया गया। शंकराचार्य ने कहा कि गाय भारतीय सभ्यता की जड़ है, जड़ काट दी तो पेड़ समाप्त हो जाएगा। 

उन्होंने कहा कि गाय के माध्यम से सनातन धर्म के मूल पर प्रहार किया जा रहा है। गौ हत्या केवल पशु-वध नहीं है, यह इस सभ्यता की नींव पर प्रहार है। देवताओं की शक्ति का स्रोत विष्णु हैं। इस संसार में विष्णु की शक्ति का आधार सनातन धर्म है और सनातन धर्म के तीन स्तंभ हैं: ब्रह्म (वेद), गौ (गाय) और विप्र (ब्राह्मण)। ‘इन तीनों को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। सनातन ढहा तो देवता कमजोर होंगे। देवता कमजोर हुए तो विष्णु कमजोर होंगे।

यह वही तीन-सूत्री षड्यंत्र है जो आज हमारे विरुद्ध चल रहा है। वेदों को हाशिए पर धकेला जा रहा है। ब्राह्मण को बदनाम किया जा रहा है। और गाय को काटा जा रहा है। यह संयोग नहीं, यह सोचा-समझा, नियोजित आक्रमण है जिसे भागवत ने हजारों वर्ष पहले ही उजागर कर दिया था। आज हमें इसे समझना होगा।

मुस्लिमों ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की उठाई मांग, शंकराचार्य को सौंपा ज्ञापन

गविष्टी यात्रा के दौरान सोमावर को शहर के रामबाग साउथ मलाका क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन को महाराज जी को सौंपकर गौ माता को “राष्ट्रमाता” घोषित किए जाने की मांग की गई। इस पहल को यात्रा का एक महत्वपूर्ण एवं सामाजिक सौहार्द का प्रेरणादायक क्षण माना जा रहा है।

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