Speaking less is also a spiritual practice: Swami Chidananda

परमार्थ निकेतन में आयोजित मासिक श्रीराम कथा के मंच पर जोधपुर से संत रामप्रसाद दास महाराज और हरिद्वार से स्वामी उमाकान्तानन्द सरस्वती का आगमन हुआ।

एकादशी पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि यह दिवस केवल उपवास का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और प्रभु से जुड़ने का अवसर है। संतों की वर्षों की साधना और प्रभु कृपा के प्रसाद से ही हमें ऐसे दिव्य सत्संगों और आध्यात्मिक अवसरों का लाभ प्राप्त होता है। हमारे मंत्रों में शक्ति है, हमारे संकीर्तन में शक्ति है, परंतु उससे भी अधिक आवश्यक है कि जिन प्रभु का हम संकीर्तन करते हैं, उनके दर्शन प्रकृति के प्रत्येक कण में करें।

जब हम प्रकृति में परमात्मा का अनुभव करने लगते हैं, तभी हमारा जीवन वास्तव में आध्यात्मिक बनता है। यात्राओं के संदर्भ में कहा कि चाहे यात्रा चारधाम की हो अथवा जीवन की, तीन बातों का सदैव ध्यान रखें। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें, जल को प्रदूषित न करें और यात्रा में गप नहीं बल्कि जप करें।

उन्होंने कहा कि केवल पर्यावरण संरक्षण का ही नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग है। कम बोलना भी एक साधना है। आवश्यक और सार्थक वचन ही बोलें। संत मुरलीधर महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीराम कथा ने सभी भक्तों को प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादाओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

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