अक्षय तृतीया पर काशी में 1100 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार होगा। इसमें पूर्वांचल के अलावा आठ राज्यों से बटुक आएंगे। इन बटुकों का 20 अप्रैल को सुबह सात बजे से वैदिक रीति-रिवाज से यज्ञोपवीत संस्कार होगा।

अक्षय तृतीया पर 1100 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार होगा। दुर्गाकुंड स्थित धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ शिक्षा मंडल में आयोजित समारोह में विधि-विधान से उपनयन संस्कार होगा। इसमें पूर्वांचल के अलावा आठ राज्यों से बटुक आएंगे।
संयोजक धर्मसंघ महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में विभिन्न प्रांतों के बटुकों का 20 अप्रैल को सुबह सात बजे से वैदिक रीति-रिवाज से यज्ञोपवीत संस्कार होगा। इसे लेकर तैयारी चल रही है।
100 से ज्यादा यज्ञ वेदियां बनाई जाएंगी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुक आहुतियां देंगे। उन्होंने बताया कि इस बार सबसे अधिक बटुकों का उपनयन संस्कार होगा। इसमें 50 फीसदी यूपी, बिहार, झारखंड के बटुक हैं। बाकी 50 फीसदी दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से आएंगे।
शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण भी होगा शुरू
धर्मसंघ से संचालित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल में अध्ययनरत वेदपाठी बटुकों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा भी दी जाएगी। इसका शुभारंभ भी अक्षय तृतीया पर ही होगा। पं. शिवनाथ मिश्र संगीत अकादमी के प्रशिक्षकों द्वारा बटुकों को तबला, गायन एवं हारमोनियम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बाद में उन्हें सितार और बांसुरी जैसे वाद्ययंत्रों से भी अवगत कराया जाएगा।