राम मंदिर परिसर में 10 एकड़ में पंचवटी का निर्माण करीब पूरा हो गया है। यहां वनवास युग का साक्षात्कार होगा। श्रद्धालुओं को राम-सीता-लक्ष्मण के तपोवन जैसा अनुभव मिलेगा। आगे पढ़ें पूरी खबर…

यूपी के अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ने के लिए 10 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही भव्य पंचवटी का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। यह विशेष उद्यान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल की स्मृतियों को जीवंत करेगा। परिसर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालु यहां प्रकृति, संस्कृति और आस्था का अनूठा संगम देख सकेंगे।
पंचवटी का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को वनवास काल का वातावरण महसूस हो। हरियाली से आच्छादित इस क्षेत्र में पारंपरिक शैली के वृक्ष, प्राकृतिक पगडंडियां, विश्राम स्थल और शांत वातावरण तैयार किया गया है। उद्यान में विशेष रूप से धार्मिक व औषधीय महत्व वाले वृक्ष लगाए गए हैं, जिनका उल्लेख रामायण और भारतीय परंपरा में मिलता है।
बैठने की व्यवस्था, सुगम मार्ग और सुंदरीकरण भी किया गया
परिसर में विकसित की गई हरियाली, वृक्षों की कतारें और प्राकृतिक संरचना इस स्थल को विशेष आकर्षण प्रदान कर ही हैं। पंचवटी के आसपास बैठने की व्यवस्था, सुगम मार्ग और सुंदरीकरण कार्य भी किया गया है, ताकि दर्शनार्थियों को सुविधा मिल सके। जीएमआर कंपनी की ओर से पंचवटी को विकसित किया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पंचवटी केवल उद्यान नहीं बल्कि, रामायण युग की जीवनशैली, प्रकृति प्रेम और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक होगा। यहां औषधीय महत्व के पांच प्रकार के वृक्ष लगाए गए हैं। पंचवटी से सटे कुबेर नवरत्न टीला के पास भी वनक्षेत्र विकसित किया गया है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पंचवटी व कुबेर टीला दोनों की भव्यता आकर्षित करेगी। यहां श्रद्धालु दर्शन के साथ अध्यात्म और प्रकृति का दुर्लभ अनुभव प्राप्त करेंगे।
अंतिम चरण में पहुंचा जलाशय का निर्माण
पंचवटी की सबसे बड़ी खासियत यहां बन रहा जलाशय है। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। यह जलाशय न केवल सौंदर्य बढ़ाएगा, बल्कि पक्षियों, वन्य जीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण में भी सहायक होगा। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान ध्यान, शांति और प्रकृति के बीच आत्मिक अनुभूति का केंद्र बनेगा। यह पिकनिक स्पॉट नहीं होगा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए साधना व ध्यान का केंद्र बनेगा।