हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि पर जिला कारागार रोशनाबाद में अखंड परशुराम अखाड़ा की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। पहले दिन विधि-विधान के साथ कलश यात्रा निकाली गई, जिसके बाद कथा का शुभारंभ हुआ। भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही सुख-दुख का अनुभव करना पड़ता है। जेल में बंद सभी कैदी भी अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं, लेकिन यह समय उनके आत्ममंथन और सुधार का अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि दंड पूर्ण होने के बाद ये सभी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन यापन करेंगे। अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि चैत्र प्रतिपदा से सृष्टि का आरंभ माना जाता है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने कहा कि हरिद्वार जेल केवल कारागार नहीं, बल्कि एक सुधार गृह है। यहां आने वाले बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से समय-समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजनों से बंदियों को नई दिशा और जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।