शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई।माँ शैलपुत्री को देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है।माँ का वाहन वृषभ (बैल) है।उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित है।धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं।नवरात्रि के पहले दिन भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर माता का दर्शन किया।माता के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठे।भक्तों ने सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ पूजा की।नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।जय माता दी।