पुरानी कुंडी, गंगा किनारे 11 सितंबर को श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. हर्षिता जी महाराज ने पंचाग्नि तपस्या की।सुबह 8:43 बजे से 10 बजे तक उन्होंने अग्निकुंडों के बीच बैठकर साधना की।शाम को 3 बजे से 5 बजे तक पुनः तपस्या का क्रम चला।माता जी पीले वस्त्र धारण कर गंगा किनारे ध्यान और साधना में लीन दिखाई दीं।तपस्या स्थल के चारों ओर अग्निकुंड जल रहे थे और वातावरण धुएं से भर गया था।त्रिशूल के साथ माता जी की साधना का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।सनातन परंपरा में पंचाग्नि तपस्या को कठिन आध्यात्मिक साधनाओं में माना जाता है।माता जी ने दोनों सत्रों में शांत भाव से ध्यान और साधना की।गंगा किनारे हुई इस तपस्या से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।गंगा तट पर हुई यह तपस्या श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का विशेष दृश्य रही।
गंगा तट पर हुई यह तपस्या श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का विशेष दृश्य रही।