धार्मिक नगरी उज्जैन में एक सप्ताह पहले प्रयागराज महाकुंभ में चर्चित हुईं हर्षा रिछारिया ने मोन तीर्थ के महामंडलेश्वर सुमनानंद महाराज से संन्यास ग्रहण किया था। संन्यास के बाद उनके इस निर्णय पर कई साधु-संतों ने सवाल उठाए थे। अब हर्षा रिछारिया, जो संन्यास के बाद स्वामी हर्षानंद गिरी के नाम से जानी जा रही हैं, ने एक वीडियो जारी कर इन आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने आलोचना करने वालों से सवाल पूछे हैं और मानहानि का दावा करने की बात भी कही है।

स्वामी हर्षानंद गिरी ने अपने पहनावे और लुक को लेकर हो रही आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। वीडियो में उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर की सलाह पर चश्मा पहनती हैं, लेकिन इसे गलत तरीके से फैशन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके आध्यात्मिक जीवन पर बिना पूरी जानकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2019 से वे उत्तराखंड में अपने गुरु के सानिध्य में रहकर कठिन परिस्थितियों में साधना कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि उनके संन्यास को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है और उन पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। “नचनिया-कुदनिया” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के मार्ग पर चल रही हैं और सच्चा साधु ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार से दूर रहता है।

फॉरेन फंडिंग के आरोपों को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया। स्वामी हर्षानंद गिरी ने कहा कि यदि एक भी आरोप सही साबित होता है तो वे अपनी पूरी संपत्ति त्याग देंगी। वहीं, आरोप गलत साबित होने पर संबंधित पक्ष से एक करोड़ रुपये मानहानि की मांग करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी बैंक डिटेल्स सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।

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