पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए बहुत कठोर तपस्या की। लंबे समय तक तपस्या करने के कारण उनका शरीर धूल-मिट्टी से ढक गया और उनका रंग बहुत काला पड़ गया।माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी तपस्या स्वीकार की। इसके बाद भगवान शिव ने गंगाजल से माता को स्नान कराया। गंगाजल के प्रभाव से माता का शरीर अत्यंत उज्ज्वल और गौर वर्ण का हो गया। इसी कारण उनका नाम महागौरी पड़ा।माँ महागौरी को शांति, पवित्रता और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन उनकी पूजा की जाती है।