देवता की डोली और पद चिह्नों को दोहा गांव के मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से देवता को विदाई दी।

चालदा महासू देवता खत शैली के दोहा गांव स्थित मंदिर से खत कोरू के कचटा गांव में प्रवास के लिए पहुंच गए। 39 साल बाद हुए देवता के आगमन के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कचटा गांव पहुंचे। श्रद्धालुओं ने देव दर्शन करके सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। साथ ही विशाल भंडारे का प्रसाद भी ग्रहण किया।
बृहस्पतिवार की सुबह लगभग 11.00 बजे देवता की डोली और पद चिह्नों को दोहा गांव के मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से देवता को विदाई दी। इसके पश्चात लगभग छह घंटे की पैदल यात्रा के बाद देवता शाम छह बजे कचटा गांव पहुंचे जहां पूरे विधि विधान के साथ उन्हें नवनिर्मित मंदिर में विराजमान कराया गया।
मंदिर परिसर में सबसे पहले देवता के बकरों ने प्रवेश किया। इस दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान श्रद्धालु देवता के दर्शन को आतुर दिखे। यह यात्रा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।