Shrimad Bhagwat Katha begins at Parmarth Niketan

परमार्थ निकेतन आश्रम में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सान्निध्य में कथावाचक रमेश भाई ओझा के श्रीमुख से ज्ञान गंगा स्वरुप श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया गया।

सोमवार को गंगा तट पर स्वामी चिदानंद सरस्वती, जयराम आश्रम के अध्यक्ष पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, आंध्र प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोहर भास्कर राव ने संयुक्त रूप से कथा का उद्घाटन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि यह भारत का सौभाग्य है कि यहां ऐसे संत हैं, ऐसी भगवत सत्ता है, जो विश्व की युवा पीढ़ी को अपनी पावनता से स्पर्श कर रही है।

श्रीमद्भागवत कथाओं के माध्यम से परिवारों में संस्कारों की गंगा प्रवाहित हो रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यदि हम कुछ कर सकते हैं, तो उन्हें संस्कारों से युक्त करें। बाहर के आकाश और दूरियों को कम करने के लिए हमें विज्ञान चाहिए, किंतु भीतर के आकाश से मिलने और आंतरिक दूरी को कम करने के लिए हमें श्रीमद्भागवत कथा, भारतीय संस्कृति और सनातन के संस्कार चाहिए।

जयराम आश्रम के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा के किनारे कथा श्रवण करने का अवसर बार-बार नहीं मिलता, यह केवल आशीर्वाद से ही प्राप्त होता है। इस मौके पर मनोरथी, पूरणमल, बालुराम अग्रवाल, नरेश अग्रवाल आदि शामिल रहे।

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