विक्रम संवत 2083 में चंद्र ज्येष्ठ मास अधिकमास के रूप में आया है। 17 मई से 15 जून तक चलने वाला यह पुरुषोत्तम मास हिंदू पंचांग की एक दुर्लभ और अत्यंत पवित्र घटना है। वेदांग ज्योतिष संस्थान, झलवा के ज्योतिषाचार्य अजय कुमार मिश्र के अनुसार यह मास आध्यात्मिक साधना, जप, दान और भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

Purushottam month 2026: Adhik Maas, a virtuous and sin-destroying month, begins; a rare coincidence is forming

विक्रम संवत 2083 में चंद्र ज्येष्ठ मास अधिकमास के रूप में आया है। 17 मई से 15 जून तक चलने वाला यह पुरुषोत्तम मास हिंदू पंचांग की एक दुर्लभ और अत्यंत पवित्र घटना है। वेदांग ज्योतिष संस्थान, झलवा के ज्योतिषाचार्य अजय कुमार मिश्र के अनुसार यह मास आध्यात्मिक साधना, जप, दान और भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

क्यों आता है अधिकमास

सूर्य सिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और ब्रह्म सिद्धांत के अनुसार जिस चंद्र मास में सूर्य संंक्रांति न हो, उसे अधिकमास कहते हैं। एक सौर वर्ष 365 दिन छह घंटे का होता है और चंद्र वर्ष केवल 354 दिन का। इसी अंतर को संतुलित करने लिए अधिकमास की व्यवस्था की गई है। यह हर तीसरे वर्ष आता है।

भगवान विष्णु का नाम है पुरुषोत्तम

इस मास को भगवान विष्णु ने स्वयं का नाम पुरुषोत्तम देकर कहा कि अब मैं इस मास का स्वामी हूं और यह सारे जगत में पवित्र होगा। इस मास में प्रतिदिन स्नान, दान और जप करने से दुख, शोक, पाप और दरिद्रता का नाश होता है। श्रद्धा पूर्वक व्रत और श्री विष्णु पूजन करने से मृत्यु का भय नहीं रहता।

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