29 जनवरी को जया एकादशी व्रत है। शास्त्रों में इस एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी का व्रत रखन से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जया एकादशी सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं में जया एकादशी को विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि यह व्रत न केवल सांसारिक सुख प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी बनता है। पद्म पुराण औरअन्य ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है, जहां बताया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से भूत-प्रेत जैसी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में शांति व समृद्धि आती है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 29 जनवरी को पड़ रही है।
धार्मिक महत्व
पद्म पुराण में उल्लेख है कि जो भक्त इस व्रत को विधि-विधान से करता है, उसे सप्त जन्मों के पापों से छुटकारा मिलता है और वह विष्णु लोक में स्थान पाता है। धार्मिक दृष्टि से, यह व्रत व्यक्ति को आत्म-संयम सिखाता है। सनातन परंपरा में एकादशी व्रतों का महत्व इसलिए है क्योंकि ये चंद्रमा के प्रभाव से जुड़े होते हैं और जया एकादशी विशेष रूप से पापनाशक मानी जाती है। यह व्रत करने से जीवन की हर परेशानी दूर होती है, जैसे रोग, शत्रु बाधा और आर्थिक संकट। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन विष्णु जी की कृपा से मनुष्य जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।