महाशिवरात्रि पर मुरादाबाद के पीतल और नेपाल के रुद्राक्ष से शिवमय धर्मनगरी हुई। इस बार भस्म, बेलपत्र और सिद्ध मालाओं का क्रेज है। 

Kashi filled with metals worth Rs 250 crore and rare Rudrakshas in varanasi

महाशिवरात्रि से पहले ही काशी का बाजार शिवमय हो चुका है। इस महापर्व को लेकर व्यापारियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। इस साल मुरादाबाद के पीतल उद्योग से लेकर नेपाल के जंगलों से आई सामग्रियों ने जिले के बाजार को गुलजार कर दिया है।

जिले के प्राचीन बाजार चौक, ठठेरी बाजार, विश्वनाथ गली और गोदौलिया समेत कई बड़े और छोटे शोरूम में इस बार मुरादाबाद से विशेष तौर पर मंगाए गए पीतल और तांबे के बर्तनों व मूर्तियों का बोलबाला है। 

कारोबारी विशाल कसेरा के मुताबिक, लगभग 250 करोड़ रुपये का तांबे और पीतल का सामान मुरादाबाद से काशी पहुंचा है। इनमें नक्काशीदार कलश, अखंड दीप, पीतल की घंटियां और भगवान शिव की सुंदर मूर्तियां व शिवलिंग शामिल हैं। थोक व्यापारियों का कहना है कि पिछले बार की तुलना में इस बार कीमतों में 30% का इजाफा हुआ है।

नेपाल और इंडोनेशिया के रुद्राक्ष की भारी डिमांड

कारोबारी अंजली जायसवाल बताती हैं कि इस बार रुद्राक्ष की माला, ब्रेसलेट और लॉकेट की काफी डिमांड है। बाजार में नेपाल और इंडोनेशिया से आए दुर्लभ रुद्राक्ष की मालाओं की खेप पहुंची है। एक मुखी से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष और गौरी-शंकर रुद्राक्ष डिमांड में है। विशेष रूप से नेपाल के बड़े दानों वाले रुद्राक्ष की मांग सबसे अधिक है। 

पूजा-पाठ सामग्री का 80 करोड़ का बाजार

अर्दली बाजार के पूजा सामग्री विक्रेता विनय कुमार बताते हैं कि इस बार पूजा-पाठ से जुड़े सामान जैसे चंदन, भस्म, इत्र, बेलपत्र, भांग-धतूरा और शृंगार की अन्य वस्तुओं का व्यापार 80 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। इसके अलावा झंडा, धतुरा आदि की भी डिमांड पिछले वर्ष की अपेक्षा बढ़ी है। महाशिवरात्रि पर लोग पूजा सामानों के अलावा रुद्राभिषेक के सामान की भी खरीदारी कर रहे हैं।

पीतल और तांबे के इन सामानों की अधिक डिमांड
तांबे का लोटा, अभिषेक शृंगी, पंचपात्र और आचमनी, अभिषेक स्टैंड, पंच आरती दीया, अखंड ज्योति दीप, धूप दानी, घंटी व शंख स्टैंड, पीतल का त्रिशूल और डमरू, पीतल का नाग, शिव परिवार की मूर्तियां, नंदी की मूर्ति, पीतल की पूजा थाली आदि।

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