संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुओं की तैयारियों की कमी के कारण भक्ति रूठती है। वह तैयारी भक्ति से ही संभव है। इसलिए परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए उस भक्ति और अपनेपन को जगाने की जरूरत है।

एकता और सात्विक शक्ति को अपनाने से भारत आने वाले 20 साल में विश्व गुरु बनकर संपूर्ण दुनिया को सुख, शांति देने वाला नया हिंदू और धर्म राष्ट्र बनेगा। इसको कोई नकार नहीं सकता, क्योंकि भारत का जन्म ही इसलिए हुआ है। इसके लिए हिंदुओं को तैयारी में लग जाना है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह बातें कुंभ मेला क्षेत्र स्थित सुदामा कुटी के शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कहीं।

उन्होंने संत, महंतों के सानिध्य में दीप प्रज्ज्वलन कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान कहा कि पिछले 50 साल के अनुभव से पता चलता है कि जैसे-जैसे हिंदू एक हुआ, राष्ट्र विरोधी ताकतों के टुकड़े होते गए। राष्ट्रविरोधी शक्तियों का सामना करने के लिए हिंदुओं को भक्ति के आधार पर सबको अपना मानकर और आत्मबल का बोध लेकर सात्विक शक्ति के आधार पर कर्म करना होगा।

इस दौरान उन्होंने अमेरिका के वर्तमान हालातों को इंगित करते हुए कहा कि सिर्फ शक्ति है तो वह सारी दुनिया को सताते हैं और महाशक्ति बनते हैं, लेकिन भारत में अमरत्व की शक्ति है। 

उन्होंने कहा कि परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं। ऐसी परिस्थितियां पहली बार नहीं आई हैं। हिंदुओं ने सुल्तानों और बादशाहों के बीच पांच सौ साल तक जीवन जिया। अगर बुरा होना होता तो उसी समय हो जाता। लेकिन उन सबका सामना करते हुए हिंदुओं का देश आगे बढ़ रहा है। उस विषम परिस्थितियों में हिंदुओं ने अपना बलिदान देकर धर्म को बचाए रखा। फिर से सनातन धर्म का डंका दुनियाभर में संतों के द्वारा प्रसारित हो रहा है। यह शक्ति भक्ति से आई। 

उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने भी अत्याचार सहे, लेकिन उन्होंने भक्ति की शक्ति से उन अत्याचारों का सामना करते हुए आसुरी शक्तियों को नष्ट किया। वह ऐसी शक्ति थी जो कभी मिट नहीं सकती थी। भक्ति तभी आती है जब व्यक्ति के पास समर्पण का भाव हो। लोगों को तैयार रहना पड़ता है। बानर वीर तैयार हैं तो राम जरूर आएंगे। संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुओं की तैयारियों की कमी के कारण भक्ति रूठती है। वह तैयारी भक्ति से ही संभव है। इसलिए परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए उस भक्ति और अपनेपन को जगाने की जरूरत है।

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