फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा।

शास्त्रों में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र, प्राचीन और पापनाशिनी माना गया है। यह तिथि स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप मानी जाती है, जो साधक के जीवन से पाप, क्लेश और बाधाओं का नाश करती है। प्रत्येक एकादशी अपने नाम और स्वरूप के अनुसार विशेष फल प्रदान करती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विजया एकादशी विशेष रूप से विजय, सिद्धि और मनोवांछित फल देने वाली मानी गई है। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा। ऐसे में इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा।

हर बाधा पर विजय का दिव्य व्रत
विजया नाम ही इस एकादशी के प्रभाव को प्रकट करता है। यह व्रत साधक को आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार की चुनौतियों पर विजय दिलाने वाला है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास करने से शत्रु बाधाएं शांत होती हैं, अशुभता का नाश होता है और शुभ फलों में वृद्धि होती है। जो व्यक्ति जीवन में संघर्षों से घिरा हो, उसे इस एकादशी का व्रत विशेष रूप से करना चाहिए। पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इसकी महिमा बताते हुए कहा है कि इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है और साधक को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता मिलती है।

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