शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज में गंगा स्नान करने से रोके जाने और प्रशासन द्वारा उनसे अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाए जाने के संबंध में जवाब मांगे जाने के विरोध में श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संयोजन में संतों ने हरकी पैड़ी के सामने मालवीय घाट पर सांकेतिक धरना दिया। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज प्रशासन ने जिस तरह का कृत्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ किया है। वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज प्रशासन को शंकराचार्य से माफी मांगे और उन्हे सम्मान के साथ स्नान कराए। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता है तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन मंत्री स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने कहा कि प्रशासन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके शंकराचार्य होने के संबंध में जवाब मांगने का कोई अधिकार नहीं है। शंकराचार्य साधु संतों द्वारा चुने जाते है। लोगों की आस्था द्वारा चुने जाता है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज प्रशासन के अधिकारियों द्वारा अपने कृत्यों के लिए अब तक भी माफी नहीं मांगे जाने से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हें। उन्होंने कहा कि कि जल्द से जल्द सरकार का कोई प्रतिनिधिमंडल या कोई प्रतिनिधि शंकराचार्य से मिलकर उनसे माफी मांगे। संत सरल स्वभाव के होते हैं।