मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम तट पर हंगामा हो गया। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों की पुलिस से धक्कामुक्की हो गई। धक्का-मुक्की में 12 घायल हो गए। कमर व पैर में चोट आने की वजह से तीन शिष्य अस्पताल में भर्ती हैं। शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर शिष्यों के साथ अन्न-जल त्याग धरने पर बैठ गए।

मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम के पास पुलिस से धक्कामुक्की व हंगामे में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के 12 समर्थक घायल हो गए, जिन्हें स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल भेजा गया।
वहीं, देर शाम शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर शिष्यों के साथ अन्न-जल त्याग धरने पर बैठ गए। इस बीच इस मसले पर सियासत भी तेज हो गई है। दिन में कांग्रेस कमेटी के महासचिव विवेकानंद पाठक और देर रात पूर्व विधायक अनुग्रहण नारायण सिंह भी शंकराचार्य से मिलने पहुंच गए।
घायलों में सात से आठ शिष्यों को पैर, हाथ, कमर व चेहरे में चोट आने की वजह से भर्ती होने के लिए कहा गया जिनमें तीन ही एसआरएन अस्पताल में रुके। वहीं, अन्य घायल शिष्यों ने भर्ती होने से इन्कार कर दिया।
भर्ती होने वालों में शिव शक्ति, दंगल सिंह और डॉ.दुर्गा प्रसाद पचौरी शामिल हैं। इनमें शिव शक्ति, देवी प्रसाद पचौरी को कमर में और दंगल सिंह को पैर में चोट आई है। तीनों घायलों ने पुलिस पर मारने-पीटने का आरोप लगाया है। फिलहाल, ईएमओ डॉ. सत्य प्रकार का कहना है कि सोमवार को एक्सरे रिपोर्ट के बाद चोट की गंभीरता का पता चल सकेगा।
कंप्यूटर बाबा रथ के सामने लेट गए
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र ने आरोप लगाया कि योगीराज के अनुसार प्रशासन ने साधु-संतों को पीटा है। यह निंदनीय है। उधर धरने के दौरान कंप्यूटर बाबा रथ के सामने जाकर लेट गए। बिलखते हुए उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन शंकराचार्य से क्षमा याचना नहीं करेगा, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। देर शाम तक शंकराचार्य का धरना जारी रहा। माघ मेले में किसी भी धार्मिक परंपरा की शुरुआत कदाचित उचित और शास्त्र सम्मत नहीं है। जिस आयोजन में संगम में करोड़ों लोग पुण्य स्नान करने के लिए एकत्र हैं, वहां पालकी या रथ ले जाकर अव्यवस्था पैदा करना सर्वथा अनुचित है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद, देवतीर्थ गोवर्धन पीठ