वाराणसी में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस दिन शिव-गौरा नवग्रहों के काष्ठ पट्ट पर विराजेंगे। इसके लिए पांच राज्यों से लाई गई लकड़ियों से काष्ठ पट्ट बना है। 

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर धार्मिक उत्सव के साथ सदियों पुरानी लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का संगम दिखेगा। इस बार काशीपुराधीश्वर भगवान विश्वनाथ और माता गौरा नवग्रहों से सहित 11 प्रकार की पवित्र लकड़ियों से निर्मित विशेष काष्ठ पट्ट पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। पांच राज्यों से लाई गई लकड़ियों से काष्ठ पट्ट बना है।

महाशिवरात्रि से पहले 13 फरवरी को हल्दी और शगुन के लोकाचार निभाए जाएंगे। जबकि महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का विशेष शृंगार, पूजन और विवाह के लोकाचार की रस्म पूरी की जाएगी। नवग्रहों की लकड़ियों से बने काष्ठ पट्ट पर बाबा और माता गौरा विराजमान होंगे। हल्दी की रस्म में काष्ठ पट्ट का भी प्रयोग होगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर इन आयोजनों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परंपरानुसार बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की चल प्रतिमाएं विधि-विधान से काष्ठपट्ट पर विराजमान कर मांगलिक अनुष्ठान कराए जाएंगे।

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