अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में बालक राम की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जाती है। प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी अब सीधे एक साल 15 दिन बाद 19 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। पंचांग और तिथियों की खगोलीय गणना के अनुसार साल 2025 में पौष शुक्ल द्वादशी दो बार पड़ी थी, जबकि 2026 में अधिकमास के कारण यह तिथि एक बार भी नहीं आएगी।
22 जनवरी 2024 को भव्य मंदिर में बालक राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। उस दिन पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि थी। प्राण प्रतिष्ठा उत्सव को राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रतिष्ठा द्वादशी का नाम दिया है। हर साल प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जाएगी। बीते साल प्रतिष्ठा द्वादशी का उत्सव दो बार मनाया गया। प्रतिष्ठा द्वादशी का पहला उत्सव 11 जनवरी व दूसरा 31 दिसंबर को मनाया गया है, लेकिन वर्तमान वर्ष 2026 में यह तिथि नहीं आ रही है।

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा बताते हैं कि हिंदू पंचांग चंद्र-सौर प्रणाली पर आधारित होता है। इसमें तिथि की गणना चंद्रमा और सूर्य के आपसी कोण (डिग्री) से की जाती है। एक तिथि तब बदलती है, जब चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है। चंद्र मास लगभग 29 दिन का होता है, जबकि सौर मास करीब 30-31 दिन का। इस अंतर के कारण कई बार एक ही तिथि दो सौर तिथियों में पड़ जाती है। इसे तिथि क्षय या तिथि वृद्धि की स्थिति कहा जाता है। 2025 में पौष मास के दौरान तिथि वृद्धि की स्थिति बनी। इससे पौष शुक्ल द्वादशी दो बार आई और उसी वर्ष दो बार प्रतिष्ठा द्वादशी मनाई गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttarakhand