माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-चार स्थित सतुआ बाबा के शिविर में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने दूसरे दिन बुधवार को शिव महापुराण की कथा सुनाई। प्रदीप मिश्रा ने कहा, भगवान शिव मंदिर में ही मिलें, यह जरूरी नहीं है।

Pradeep Mishra narrates the story: It is not necessary that Lord Shiva is found only in the temple

माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-चार स्थित सतुआ बाबा के शिविर में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने दूसरे दिन बुधवार को शिव महापुराण की कथा सुनाई। प्रदीप मिश्रा ने कहा, भगवान शिव मंदिर में ही मिलें, यह जरूरी नहीं है। शिव श्मशान में भी मिल सकते हैं। वह हर जगह हैं। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल अर्पित करने के लिए कहा। इस दौरान मनोहरा की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि उसने गरीबी के चलते बिना लोटे के ही अपने मुख से भगवान शिव को जल अर्पण करना जारी रखा और एक दिन भगवान ने उसे दर्शन दिए। प्रभु मृत्युलोक में विराजमान हैं।

शिव प्रयागराज की धरती पर भी हैं। कथावाचक ने वासुकि नाग की कथा प्रसंग से प्रयाग महात्म्य का वर्णन किया। कहा, वासुकि नाग ने देवताओं ने पूछा कि तुम त्रिवेणी पर क्या कर रहे हो तो उन्होंने बताया कि सागर मंथन के दौरान उनका शरीर बहुत कष्ट में हो गया है। इस कष्ट से मुक्ति पाने के लिए लिए त्रिवेणी आए हैं। क्योंकि यहां आने मात्र से सारे कष्ट मिट जाते हैं।

उन्होंने कहा, जब कोई पूछे कि आप प्रयाग की धरती पर क्यों आए हैं तो उन्हें यही जवाब दें कि कष्ट से मुक्ति पाने के लिए आए हैं। विधर्मियों ने महाकुंभ को बदनाम करने की साजिश की थी ः कथावाचक प्रदीप मिश्र ने कहा कि विधर्मियों ने प्रयागराज के महाकुंभ को बदनाम करने की साजिश रची थी। आगे रहकर लोगों को धक्का देने का प्रयास किया, लेकिन वो नहीं जानते कि ये सनातनी शेर हैं। सनातनी शेर सोता नहीं जागता और इन्हीं की बदौलत आयोजन को सफल बनाया गया। अब इस बार माघ मेला भी किसी महाकुंभ से कम नहीं है।

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