आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर है और शांति सनातन से ही आएगी। इसलिए बाबा विश्वनाथ से विश्व के लिए शांति मांगने आया हूं। सभी मिलकर बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करेंगे। ध्यान करेंगे क्योंकि ध्यान, भजन और प्रार्थना की तरंगें तेजी से दुनिया में फैलती हैं।
मंगलवार को श्रीश्री रवि शंकर ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर सिगरा में आयोजित सत्संग में करीब दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में अशांति का माहौल है। अगर शांति के लिए प्रयास नहीं किया गया है ये अशांति विश्व युद्ध का रूप ले लेगी। इसलिए सभी ध्यान, भजन और प्रार्थना करें। इसकी पद्धतियों में वैज्ञानिक तत्व मौजूद हैं। रविशंकर ने कहा कि ओम नम: शिवाय का जप और हनुमान चालीसा का पाठ करें। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि प्रतिदिन कम से कम 10 से 15 मिनट अपने परिवार और मित्रों के साथ ध्यान और सत्संग के लिए निकालें। उन्होंने काशी की विद्वता की सराहना करते हुए सामूहिक साधना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कौवे को सबसे तेज मना गया है। वह आज का एआई है। उसका मस्तिष्क काफी तीव्र होता है। क्या होने वाला है ये वह पहले ही भाप लेता है, जैसा कि आज के दौर में एआई कर रहा है। इस पर अमेरिका में शोध हो रहा है। श्रीश्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के 45 साल पूरे होने पर सभी को बधाई दी।
श्रीकाशी विश्वनाथ, कालभैरव व माता विशालाक्षी का किए दर्शन
श्रीश्री रविशंकर दोपहर में काशी पहुंचे। वहां से सीधे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजन किया। कहा कि मैंने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की है कि विश्व में शांति बनी रहे और हमारा देश भारत निरंतर तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर रहे। उन्होंने बाबा कालभैरव, माता विशालाक्षी और गंगेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। उनकी माता का नाम भी माता विशालाक्षी था और जब उनकी माता का निधन हुआ था तो वह विशालाक्षी मंदिर में दर्शन कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने ललिता घाट पर भी पूजन किया।
