जब धाम बुलाता है तो मार्ग अपने आप खुल जाते हैं। आज यही भाव सामने आया जब खबर फैली कि संत प्रेमानंद जी महाराज बरसाना पहुंच गए हैं। सुनते ही गांव में हलचल दौड़ गयी। कोई परिक्रमा मार्ग की ओर भागा तो कोई सीधे मंदिर की तरफ। कुछ ही देर में गलियां श्रद्धा से भर गईं। लोग कहते दिखे इतने बड़े संत अगर बिना बुलावे खुद चलकर आए हैं, तो यह धाम की इच्छा है।

संत प्रेमानंद महाराज बिना किसी स्वागत या मंच के सीधे श्रीजी मंदिर पहुंचे। पुरानी सीढ़ियों से शांति के साथ ऊपर बढ़े। कदमों में संन्यास की दृढता और चेहरे पर स्थिर भाव। सामान्य भक्तों की तरह कतार में खड़े हुए और गर्भगृह में पहुंचकर राधारानी के सामने कुछ समय मौन रहे। उस क्षण मंदिर परिसर ऐसे शांत हो गया मानो भाव ने शब्द रोक दिए हों।
दर्शन के बाद संत प्रेमानंद जी ने कहा यहां हवाएं नही चलतीं यहां राधा नाम की अनुभूति बहती है। यह सुनते ही कई श्रद्धालु भावुक हो गए। स्थानीय संतों ने इसे बिना आडंबर की सच्ची भक्ति का दुर्लभ दर्शन बताया। बरसाना में दिनभर एक ही बात होती रही जिस भाव को पाने लोग आश्रमों तक जाते हैं आज वही भाव सीढ़ियों से होकर धाम में उतर आया।