नवरात्रि के नौवें दिन माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। माँ सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि की रचना का समय आया, तब चारों ओर अंधकार था। उस समय आदिशक्ति ने अपने दिव्य स्वरूप से सृष्टि में प्रकाश फैलाया। माँ सिद्धिदात्री के प्रकट होने से देवताओं और समस्त संसार को शक्ति और ज्ञान प्राप्त हुआ।माँ सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। उनके चार हाथ हैं—एक हाथ में गदा, दूसरे में चक्र, तीसरे में शंख और चौथे हाथ में कमल सुशोभित होता है।कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी माँ सिद्धिदात्री की आराधना करके अनेक सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। माँ की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे अर्धनारीश्वर कहलाए।माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ज्ञान, शक्ति, समृद्धि और मन की शांति प्रदान करती हैं। सच्चे मन से माँ की पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है।नवरात्रि के नौवें दिन माँ को श्रद्धापूर्वक फूल, फल, प्रसाद और दीप अर्पित किए जाते हैं।जय माँ सिद्धिदात्री!
जय माता दी! ????