हरितालिका तीज : ब्रह्म मुहूर्त से प्रदोष काल मुहूर्त तक महिलाएं करेंगी शिव और पार्वती की पूजा । सुहागिनें अखंड सौभाग्य और कुंवारियां मनचाहे वर की कामना के लिए 14 सितंबर को हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। माता पार्वती को सुहाग पिटारी में 16 सामग्री और भगवान शिव को वस्त्र, जनेऊ, भांग-धतूरा व 16 प्रकार की पत्तियां चढ़ाएंगी। पूजा ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाएगी, जो प्रदोष काल के दौरान भी की जाएगी। ब्रह्म मुहूर्त 04:32 बजे तथा प्रदोष काल में शाम 06:27 बजे से पूजा होगी। शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ होगी। वहीं, महिलाओं ने पूजन सामग्री की खरीदारी की।भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि तृतीया तिथि रविवार को सुबह 7:15 बजे शुरू होगी, जो अगले दिन सोमवार को सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की प्रधानता होने के कारण सोमवार को दिनभर तृतीया तिथि रहेगी। पूरे दिन हरतालिका तीज मनाया जाएगा। सुहागिनें दिनभर निर्जला व्रत का संकल्प लेकर अष्ट प्रहर की पूजा करेंगी। इस महाव्रत में विविध सामग्री तथा शास्त्रीय विधि से पूजा करेंगी। शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ होगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सुहागिनें तांबे या पीतल के कलश, सूखा नारियल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची से कलश स्थापना करेंगी। शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत, अबीर, चंदन, कुमकुम, अक्षत, इत्र, जनेऊ, कलावा, मौली से अभिषेक कर पूजन करेंगी। मिट्टी या धातु के दीपक, देशी घी, तिल या सरसों का तेल, रुई की बत्तियां, कपूर, धूपबत्ती से आरती करेंगी।

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