इस्लाम अपनाने के साथ ही प्रेम विवाह करने वाले युवक को पिता द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखने के आरोप वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने आयुष मलिक व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए देवराज सिंह मलिक को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार व पिता को निर्देश दिया है कि वह 16 सितंबर को आयुष मलिक को कोर्ट में पेश करें।याचिका में दावा किया गया है कि 31 वर्षीय आयुष मलिक ने स्वतंत्र इच्छा से बिना किसी दबाव, प्रभाव या प्रलोभन इस्लाम धर्म स्वीकार किया और उसके बाद चांदनी कुरैशी से अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध विवाह कर लिया।

नाराज होकर पिता देवराज सिंह मलिक ने छह जून 2026 को थाना शामली में एफआइआर दर्ज करा दी। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 व भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में आयुष की पत्नी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पिता की मिलीभगत से अधिकारियों ने आयुष को अवैध रूप से पिता की हिरासत में रखा है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीन ली है।याचिका आयुष के मित्र सुल्तान ने दाखिल की है। उसका दावा है कि दोस्त ने अपनी रिहाई के लिए उससे मदद मांगी थी। कोर्ट ने कहा आरोप गंभीर हैं।आदेश दिया कि तीन दिन में नोटिस के लिए कदम उठाए जाएं। यदि नियत तिथि पर आयुष को पेश नहीं किया गया तो पुलिस अधीक्षक तथा थानाध्यक्ष शामली को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर गैरहाजिरी का कारण और बरामदगी के प्रयास बताने होंगे।

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