
भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा परमार्थ निकेतन पहुंचे। आश्रम में उन्होंने स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात कर सांध्यकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग किया। स्वामी ने उन्हें रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अनूप जलोटा का परमार्थ निकेतन से रिश्ता आज का नहीं, बल्कि उनके पिता स्व. पुरुषोत्तम दास जलोटा के समय से है। यह संबंध केवल समय की सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि यह प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की वह गंगा है जो पिछले 50 वर्षों से निरंतर प्रवाहित हो रही है। अनूप जलोटा ने कहा कि यहां आगमन एक भावनात्मक पुनर्मिलन है, जहां वर्षों पुराने संबंधों ने फिर से नई ऊर्जा प्राप्त की। यह वह क्षण है जब भक्ति, संस्कृति और प्रेम एक साथ मिलकर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण कर रहे है। यह एक ऐसी आध्यात्मिक धारा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी प्रवाहित होती रहती है।