बरसाना की गलियां होली के रंग में रंगने के लिए तैयार हैं। यहां लाखों भक्त उस दृश्य के साक्षी बनेंगे, जहां घूंघट में हुरियारिनें लाठियां उठाएंगी और ढाल थामे हुरियारे सामने होंगे। 

Millions of devotees will witness Lathmar Holi in Rangili Gali.

फाल्गुन पूरे रंग में है और बरसाना की रंगीली गली एक बार फिर होली के रंग में सराबोर होने को तैयार है। देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्त उस दृश्य के साक्षी बनेंगे, जहां घूंघट में हुरियारिनें लाठियां उठाएंगी और ढाल थामे हुरियारे सामने होंगे। यह दृश्य केवल होली का नहीं, बल्कि ब्रज की उस परंपरा का होगा, जो सदियों से राधा कृष्ण प्रेम की पहचान बनी हुई है।

बरसाना और नंदगांव की लठामार होली भक्ति और मर्यादा के साथ निभाई जाने वाली परंपरा है। ब्रज परंपरा के अनुसार सन् 1569 में रसिक संत नारायण भट्ट ने द्वापर की राधा कृष्ण लीला को लोक जीवन में जीवित रखने के उद्देश्य से इस परंपरा का सूत्रपात किया था। राधा रानी के विग्रह प्रागट्य से जुड़ी यह लीला आज भी उसी अनुशासन और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। 24 फरवरी को श्रीजी मंदिर प्रांगण से लड्डू होली के साथ फाल्गुनी रंग की शुरुआत होगी।

प्रसाद रूपी लड्डू जैसे ही भक्तों पर बरसेंगे, वैसे ही पूरे धाम में होली का रंग चढ़ जाएगा। 25 फरवरी को बरसाना की लठामार होली अपने शिखर पर होगी। 26 फरवरी को यही परंपरा नंदगांव में निभाई जाएगी। बरसाना की गोपियां वहां पहुंचेंगी और नंदगांव की गलियों में लाठियों की गूंज सुनाई देगी। ढोल नगाड़ों की थाप और फाग की तान के बीच श्रद्धालु लठामार होली के उस रूप को देखेंगे, जो ब्रज की पहचान है। प्रशासन भी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। भीड़ नियंत्रण को लेकर बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की गई है।

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