Mass offerings were made in the Ashwamedha Yagna

अयोध्या। सरयू नदी के किनारे बालू घाट पर अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में आयोजित नौ दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ में दिल्ली, मुंबई, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित थाईलैंड से आए मातृ भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर मातेश्वरी परिवार के संस्थापक सद्गुरु महाराज ने कहा कि संपूर्ण धरा पर आदर्शवादी बनना है तो भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।

कहा कि धन्य है लक्ष्मण जैसा भाई, धन्य है मां सीता जो राज नंदिनी होकर भी अपने धर्म के लिए पति के साथ वन चली गईं। हमें अपने जीवन में भगवान राम, लक्ष्मण और मां सीता से सीख लेनी चाहिए। थोड़ा सा कष्ट होने पर हम घबरा जाते हैं और धन के लिए कुछ भी कर डालते हैं। हमें अपने जीवन में माता-पिता के प्रति कर्तव्य, भाई के प्रति कर्तव्य और पति के प्रति कर्तव्य सीखना चाहिए। इसी प्रकार सास-बहू को भी एक-दूसरे के प्रति मां-बेटी जैसा भाव रखना चाहिए। हम सभी उस परम सत्ता की संतान हैं, इसलिए हमें प्रेमपूर्वक रहना चाहिए और हमेशा एक-दूसरे की भलाई के बारे में सोचना चाहिए।

कार्यक्रम में सुबह पांच बजे ध्यान योग का अभ्यास कराया गया, जिसमें सभी मातृ भक्तों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सुबह सात बजे से सामूहिक हवन कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। यज्ञ परिसर में एक मुख्य हवन कुंड 24 घंटे अखंड रूप से जल रहा है, जिसमें मातेश्वरी के आचार्य बारी-बारी से आहुति दे रहे हैं।

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