कोषागार में वित्तीय अनियमितताएं मिलने पर जांच शुरू कर दी गई है। सोमवार को जांच पूरी होने की संभावना है। अधिकारियों की मानें तो जांच में ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने रकम का गबन किया गया है।

मथुरा में कोषागार के एक सहायक लेखाकार पर करोड़ों रुपये के घोटाले का अंदेशा है। मामला प्रकाश में आने के बाद से ही वह लापता हो गया है। एक सप्ताह से उसकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक उसका सुराग नहीं लग सका है। इधर, इस घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच की गति तेज कर दी है। शनिवार को अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र ने कोषागार कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख (दस्तावेज) और कंप्यूटर डेटा को कब्जे में लिया है। साथ ही अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल में सहायक लेखाकार के साथ अन्य कौन-कौन शामिल था।
हालांकि शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि सरकारी धन के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी की गई। यह मामला तब प्रकाश में आया जब कोषाधिकारी ने कुछ खातों में भारी अंतर पाया। करोड़ों रुपये की धनराशि को पेंशन और अन्य मदों के नाम पर फर्जी तरीके से ट्रांसफर किए जाने का अंदेशा है। कोषाधिकारी अतुल पांडेय ने बताया कि वित्तीय अनियमितताओं मिलने पर जांच शुरू की गई है। सोमवार को जांच पूरी होने की संभावना है और जांच में ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने रकम का गबन किया गया है।
जांच की आंच आने पर गायब हुआ लेखाकार
सूत्रों के मुताबिक, सहायक लेखाकार पर विभागीय निगरानी काफी समय से थी। जैसे ही उसे भनक लगी कि अब मामला फाइलों तक सीमित न रह के जांच तक पहुंच जाएगा तो वह बिना किसी अधिकारी को सूचना दिए गायब हो गया। उसका मोबाइल बंद जा रहा है। यहां तक वह अपने परिजन के भी संपर्क में नहीं है। अधिकारी व कर्मचारी उसकी तलाश में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कहीं सुराग नहीं लगा है।