वसंत पंचमी से ब्रजभूमि में 40 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध होली महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गिरिराज प्रभु वसंती शृंगार में भक्तों को मोहित करते नजर आए।

Girirajji smiled in spring attire and colored powder freely thrown in Dan Ghati

ब्रजभूमि में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर रंगों के महापर्व होली का शुभारंभ हो गया। 40 दिनों तक चलने वाले ब्रज की विश्वप्रसिद्ध होली उत्सव की शुरुआत वसंत पंचमी पर विधि विधान और पारंपरिक उल्लास के साथ हुई। दानघाटी गिरिराजजी एवं मुकुट मुखारबिंद गिरिराजजी मंदिरों में प्रभु का भव्य वसंती शृंगार किया गया। सोने के आभूषणों से सजे प्रभु के स्वर्णिम मुकुट, कस्तूरी तिलक, गले में झिलमिलाता हार, हाथों में चांदी की लकुटी और पीली वसंती पोशाक ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वसंती भोग अर्पित होते ही प्रभु की मंद मुस्कान और तिरछी चितवन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वसंत पंचमी के दिन गिरिराज प्रभु के साथ होली खेली गई। प्रातः बेला में दानघाटी मंदिर पर सेवायत दीपू पुरोहित एवं मुकुट मुखारबिंद मंदिर पर सेवायत जैकी शर्मा द्वारा केसरयुक्त दूध से प्रभु का अभिषेक किया गया। 

इसके उपरांत प्रभु को सर्वांग गुलाल अर्पित कर रंग गुलाल उड़ाया गया। भक्तों ने पुष्पों और रंगों से प्रभु के साथ होली खेली, जिससे मंदिर प्रांगण भक्ति और प्रेम के रंगों से सराबोर हो गया। शाम के समय प्रभु का विशेष शृंगार पीले पुष्पों से किया गया और पीली मिठाइयों का भोग अर्पित हुआ। सेवायत जैकी शर्मा ने बताया कि गिरिराज प्रभु के होली खेले बिना ब्रज की होली अधूरी मानी जाती है। वहीं मुकुट मुखारबिंद मंदिर के रिसीवर कपिल चतुर्वेदी ने बताया कि प्रभु के बालभोग में माखन-मिश्री के साथ केसरयुक्त केसरिया मीठा दूध अर्पित किया गया।

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