राधारानी के धाम बरसाना में नव वर्ष की पहली सुबह भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंजीरों की झंकार, ढोलक की थाप और राधा नाम की गूंज सुनाई देती रही। कड़कड़ाती सर्दी में हल्की बारिश ने भक्तों को भिंगो दिया, लेकिन उनके कदम नहीं रुके।

बरसाना में नववर्ष की पहली भोर आस्था का उत्सव बनकर आई। राधा रानी के भक्त सुबह से ही मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए, जहां मधुर भजनों की धुन पर कदम थिरकते रहे। मंजीरों की झंकार, ढोलक की थाप और राधा नाम की गूंज से पूरा कस्बा भक्तिरस में डूबा रहा।
दिन चढ़ने के साथ आस्था का यह प्रवाह और गहराता चला गया। दोपहर करीब 12 बजे अचानक आसमान का मिजाज बदला और इंद्र देव ने मेघमालाएं खोल दीं। हल्की बारिश की फुहारों ने मानो जैसे भक्तों पर आशीष बरसाया। भींगे वस्त्र और ठंडी हवा के बीच भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। गलियों से लेकर मंदिर मार्ग तक नाचते-गाते बढ़ते भक्तों का रेला उमड़ पड़ा।
मंदिर पहुंचकर भी भजनों का प्रवाह थमा नहीं। दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े भक्त ताल और स्वर में राधा रानी की महिमा गाते रहे। बारिश थमने के बाद भी भक्ति की गर्माहट बनी रही। बरसाना ने फिर यह जता दिया कि यहां नववर्ष का स्वागत शोर से नहीं, बल्कि राधा नाम, भजन और मेघों के आशीष से होता है।